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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

यक्ष्मा (रोग) नाशक मंत्र

शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि। यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्मं सुमना असत्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक स्वास्थ्य मंत्र
स्वरूपगिरिश
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे कैलाशवासी शिव! हम मंगलकारी वचनों से आपकी स्तुति करते हैं, जिससे हमारा यह संपूर्ण जगत् रोगरहित और प्रसन्नचित्त हो जाए 31।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

संपूर्ण विश्व की शांति, और शरीर के समस्त रोगों (यक्ष्मा/तपेदिक आदि) का निवारण

विस्तृत लाभ

संपूर्ण विश्व की शांति, और शरीर के समस्त रोगों (यक्ष्मा/तपेदिक आदि) का निवारण 31।

जप काल

भस्म या जल अभिमंत्रित करते समय।

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यक्ष्मा (रोग) नाशक मंत्र | Pauranik