शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ श्रीमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपश्री-सम्पन्न
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समस्त ऐश्वर्य, शोभा और अष्ट-सिद्धियों से युक्त भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व । विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
ॐ मन्त्रिणे नमः
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥
ॐ क्षत्रवट नरसिंहाय नमः
ॐ बलवते नमः