श्री लक्ष्मी-नरसिंह महामंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो माता लक्ष्मी के प्रिय हैं, जिनका चित्त नित्य आनंदित है, जिनके स्वरूप में लक्ष्मी विराजमान हैं, उन 'श्रीं ह्रीं' बीज स्वरूप भगवान को नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर दरिद्रता का नाश, धन-समृद्धि की प्राप्ति, और उग्र व सौम्य ऊर्जा का आध्यात्मिक संतुलन
विस्तृत लाभ
घोर दरिद्रता का नाश, धन-समृद्धि की प्राप्ति, और उग्र व सौम्य ऊर्जा का आध्यात्मिक संतुलन।
जप काल
नित्य 56 या 108 बार जप। सिद्धि हेतु 3 लाख जप का आगमिक विधान है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अरविन्दपदद्वन्द्वायै नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पूरुषानहम्॥
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8