शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ त्रैलोक्यकुटुम्बिन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों लोकों को अपना कुटुंब मानने वाली विश्वमाता को नमन 42।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ ह्रां ह्रीं हुं समस्त ग्रह दोष विनाशाय ॐ
ॐ अरविन्दपदद्वन्द्वायै नमः
ॐ श्यामलाय नमः
ॐ महोदराय विद्महे महाजठराय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम्। गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतुं मतम्॥