विष्णु मंत्र
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवों के देव! आप ही मेरी माता, पिता, बंधु, सखा, विद्या और धन हैं; आप ही मेरे सर्वस्व हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति और सांसारिक संबंधों की आसक्ति से मुक्ति
विस्तृत लाभ
भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति और सांसारिक संबंधों की आसक्ति से मुक्ति 10।
जप काल
पूजा या आरती के अंत में समर्पण भाव से।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ निर्गुणाय नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ किशोर्यै नमः
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः।
ॐ गजाननाय हुं