विष्णु मंत्र
उरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके। राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत्साधकः शतम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो साधक राधाकुण्ड के जल में जांघ, नाभि, हृदय या कंठ तक खड़े होकर इसका सौ बार पाठ करता है...
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: राधाकुण्ड के जल में ध्यान की सिद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: राधाकुण्ड के जल में ध्यान की सिद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कोलाहलाय नमः
ॐ हरिप्रियायै नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये परमात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः