शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ वामनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवामन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
छोटे पगों से ब्रह्मांड नापकर अहंकार तोड़ने वाले को नमन।
जप काल
गमन (Walking/Moving) करते समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
ॐ करदानपरायणायै नमः
ॐ रुद्राय नमः
शान्तिकर्मणि सर्वत्र तथा दुःस्वप्नदर्शने। ग्रहपीडासु चोग्रासु माहात्म्यं शृणुयान्मम॥ 17
ॐ अनेकसुरसेविने नमः।