शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ वासुदेवाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपवसुदेव-पुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पुत्र रूप में अवतरित वासुदेव को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-व्यापकता का ज्ञान
विस्तृत लाभ
सर्व-व्यापकता का ज्ञान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कर्पूरकारणाह्लादायै नमः
ॐ ज्योतिष्मत्यै नमः
ॐ त्रयीमूर्तये नमः
ॐ दीनबन्धवे नमः
जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के ही साक्षात् अवतार हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: सर्व-कल्याण) 19।
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18