शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारऋत-सत्य वाक् मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आप मेरे लिए वेद के आधार बनें। मेरा सुना हुआ ज्ञान नष्ट न हो, इसके द्वारा मैं दिन-रात को जोड़ दूँ, मैं ऋत (सत्य) बोलूँगा।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेदों का ज्ञान और सत्य बोलने की अपार शक्ति
विस्तृत लाभ
वेदों का ज्ञान और सत्य बोलने की अपार शक्ति।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मुनिसंश्रयाय नमः
ॐ कृतागमाय नमः
ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा॥
ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः
ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥