शर-धनुष शमन मंत्र
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिंसीः पुरुषं जगत्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे कैलाश निवासी और रक्षक! आपने शत्रुओं को मारने के लिए जो बाण हाथ में लिया है, उसे शांत करें। हमारे लोगों और संसार का विनाश न करें 38।
इस मंत्र से क्या होगा?
युद्ध, अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार और महामारी से लोगों की रक्षा
विस्तृत लाभ
युद्ध, अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार और महामारी से लोगों की रक्षा 37।
जप काल
समाज या राष्ट्र पर संकट आने पर।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः
ॐ साधकप्रचुरानन्दसम्पत्सुखदायै नमः
ॐ लीलाविध्वस्तशकटाय नमः
ॐ श्री राधावल्लभाय हरिवंशप्रियाय नमो नमः
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
जो महान तपस्वी महर्षि जमदग्नि के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पितृ-दोष शांति) 19।