अदिति देवी मंत्र
(वैदिक, मातृ शक्ति एवं सर्वदेव प्रतीक)
मंत्र
मंत्र: ॐ अदितिद्योरदितिरन्तरिक्षमदिति र्माता: स पिता स पुत्र: विश्वेदेवा अदिति: पंचजना अदितिर्जातम अदितिर्रजनित्वम। ॐ आदित्याय नम:।
देवता
अदिति (देवताओं की माता, पृथ्वी, प्रकृति, बंधनहीनता और स्वतंत्रता की देवी)।
स्रोत
यह मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है और पुनर्वसु नक्षत्र से सम्बंधित है।
प्रयोजन
पुनर्वसु नक्षत्र की ऊर्जा को सशक्त बनाना, ज्योतिषीय बाधाओं से मुक्ति, मातृ शक्ति का आवाहन, सृष्टि की सभी शक्तियों से आशीर्वाद प्राप्ति, पापों से मुक्ति, तथा सर्वकल्याण। इस मंत्र का 31000 बार जप करने का विधान है ।
विधि
ज्योतिषीय साधनाओं में नक्षत्र शांति और अदिति देवी की कृपा प्राप्ति हेतु इसका जप किया जाता है।
महत्व
अदिति वैदिक pantheon की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन देवी हैं, जिन्हें देवमाता और पृथ्वी का स्वरूप भी माना गया है। वेदों में उनकी स्तुति में अनेक मंत्र हैं। यह विशिष्ट मंत्र उनकी सर्वव्यापकता और मातृशक्ति को दर्शाता है । यद्यपि अदिति का नाम शास्त्रों में वर्णित है, तथापि उनके विशिष्ट मंत्र और उपासना विधियां आज सामान्य रूप से कम ही ज्ञात हैं, विशेषकर नक्षत्र ज्योतिष के संदर्भ में।
