महागणपति बीज मंत्र: विद्या, वशीकरण और संपत्ति का उपाय !

महागणपति स्मरणमात्रसन्तुष्टाय मंत्र
(सर्वविद्या एवं सर्वकाम प्रदायक)
मंत्र:
(खंडित रूप में उपलब्ध)
ॐ क्लीं ह्रीं श्रीम् ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसन्तुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशाय सर्वकामप्रदाय भवबन्धविमोचनाय ह्रीं सर्वभूतबन्धनाय क्रों साध्याकर्षणाय क्लीं जगत्त्रयवशीकरणाय सौः सर्वमनःक्षोभनाय श्रीं महासम्पत्प्रदाय संमोहन ज्वल ज्वल हूं फट् स्वाहा।
देवता:
महागणपति।
स्रोत:
इसका स्पष्ट स्रोत उल्लेखित नहीं है, किन्तु मंत्र की संरचना इसे किसी तांत्रिक ग्रंथ से सम्बंधित दर्शाती है।
प्रयोजन:
यह मंत्र स्मरण मात्र से प्रसन्न होने वाले महागणपति की स्तुति है, जो सर्व विद्या प्रदायक, सर्व कामना पूर्ण करने वाले, भवबंधन से मुक्ति दिलाने वाले, आकर्षण, वशीकरण, सम्मोहन तथा महासम्पत्ति प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
विधि:
पीले ऊनी आसन पर पूर्वाभिमुख होकर बैठें। अपने सामने गणेश जी का चित्र, यंत्र या मूर्ति स्थापित करें। गणेश जी का पंचोपचार पूजन करें, फिर एकाग्रचित्त होकर ध्यान करें। इसके पश्चात् 3, 5, या 8 माला इस मंत्र का जप करें।
महत्व:
यह एक अत्यंत विस्तृत और अनेक बीज मंत्रों ('क्लीं', 'ह्रीं', 'श्रीं', 'ऐं', 'ग्लौं', 'क्रौं', 'गं', 'सौः') से युक्त महागणपति का विशिष्ट मंत्र है। सामान्य गणेश मंत्रों की तुलना में यह अधिक व्यापक फल देने वाला और तीव्र प्रभावकारी माना जाता है। इसकी जटिल संरचना और बीज मंत्रों का समावेश इसे गूढ़ और अल्पज्ञात बनाता है।