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पारद शिवलिंग: प्राण-प्रतिष्ठा और पूजन की सही विधि (मंत्र सहित)!
शिवलिंग

पारद शिवलिंग: प्राण-प्रतिष्ठा और पूजन की सही विधि

📿 पौराणिक•5 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 12 नवंबर 2025
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तालिका सहित षोडशोपचार पूजन मंत्र: शिवलिंग को चैतन्य करने की विशिष्ट तांत्रिक विधि पारद शिवलिंग पूजन विधि खण्ड 1: पारदेश्वर प्राण-प्रतिष्ठा एवं षोडशोपचार पूजन सिद्ध पारद शिवलिंग की स्थापना और पूजन की एक विशिष्ट विधि है। प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता: एक शास्त्रीय मीमांसा पारद शिवलिंग के विषय में दो प्रकार के कथन मिलते हैं। कई ग्रंथ...

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पारद शिवलिंग पूजन विधि

खण्ड 1: पारदेश्वर प्राण-प्रतिष्ठा एवं षोडशोपचार पूजन

सिद्ध पारद शिवलिंग की स्थापना और पूजन की एक विशिष्ट विधि है।

प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता: एक शास्त्रीय मीमांसा

पारद शिवलिंग के विषय में दो प्रकार के कथन मिलते हैं। कई ग्रंथ कहते हैं कि शुद्ध पारद शिवलिंग 'स्वयं-सिद्ध' होता है और उसे "किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं हैं"।

किंतु, तांत्रिक साधनाओं के संदर्भ में यह स्पष्ट निर्देश है कि "अशुद्ध और अचेतन पारद शिवलिंग पर किसी भी प्रकार की कोई भी साधना सफलता नहीं दे सकती है"। व्यवहार में भी, शुभ मुहूर्त देखकर शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा करवाने का विधान है।

इन दोनों कथनों का समाधान यह है कि यद्यपि एक पूर्ण-संस्कारित रसलिंग 'स्वयं-सिद्ध' होता है, तथापि विशिष्ट साधनाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए और उसे 'जाग्रत' करने के लिए, साधक को अपने शिवलिंग को 'पशुपति मंत्रों' या 'रुद्राभिषेक मंत्रों' से विधिवत 'प्राण-प्रतिष्ठित' और 'चैतन्य' अवश्य कराना चाहिए।

स्थापना विधि

पारद शिवलिंग की स्थापना घर के पूजा-गृह में की जा सकती है। स्थापना के लिए लकड़ी की चौकी पर पीतल, तांबे या चांदी की वेदी (अर्घ्या) का प्रयोग करें। 'आगम शास्त्र' के अनुसार, शिवलिंग की वेदी (योनिका, जहाँ से अभिषेक-जल बहता है) का मुख 'उत्तर दिशा' की ओर होना चाहिए, और साधक (पूजा करने वाला) को 'पूर्व दिशा' की ओर मुख करके (शिवलिंग के पश्चिम मुख के सम्मुख) बैठना चाहिए।

तालिका 1: श्री पारदेश्वर षोडशोपचार पूजा

पारद शिवलिंग की नित्य अथवा विशेष पूजा 'षोडशोपचार' (सोलह उपचारों) विधि से की जानी चाहिए। यहाँ प्रत्येक चरण के पूर्ण संस्कृत मंत्र और संक्षिप्त विधि दी गयी है, जिनका स्रोत प्रामाणिक पूजा-विधान है:

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः पुष्पाणि समर्पयामि।
क्र. उपचार संस्कृत मंत्र (पूर्ण) विधि एवं अर्थ
1. ध्यानम्
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः ध्यानं समर्पयामि।
अर्थ: "मैं उन महेश का नित्य ध्यान करता हूँ जो चांदी के पर्वत (कैलाश) के समान हैं, जिनके मस्तक पर सुन्दर चंद्रमा का मुकुट है..."। (हाथ जोड़कर पारदेश्वर महादेव का ध्यान करें)।
2. आवाहनम्
आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव।
यावत्पूजां करिष्यामि तावत्त्वं सन्निधौ भव॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः आवाहनं समर्पयामि।
अर्थ: "हे भगवान! हे देव! आइये, यहाँ इस स्थान पर स्थिर हो जाइये। जब तक मैं आपकी पूजा कर रहा हूँ, तब तक आप मेरे समक्ष रहिये।" (आवाहन मुद्रा दिखाकर पुष्प/अक्षत अर्पित करें)।
3. पाद्यम्
महादेव महेशान महादेव परात्पर।
पाद्यं गृहाण मद्दतं पार्वतीसहितेश्वर॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः पाद्यं समर्पयामि।
अर्थ: "हे महादेव, हे पार्वती सहित परमेश्वर! मेरे द्वारा दिए गए इस चरण-जल (पाद्य) को स्वीकार कीजिये।" (शिवलिंग के चरणों में या अर्घ्या में जल अर्पित करें)।
4. अर्घ्यम्
त्र्यम्बकेश सदाचार जगदादिविधायक।
अर्घ्यं गृहाण देवेश साम्बसर्वार्थदायक॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
अर्थ: "हे त्रिनेत्रधारी, सदाचार के प्रवर्तक! मेरे द्वारा दिए गए इस अर्घ्य को स्वीकार करें।" (अभिषेक पात्र में जल अर्पित करें)।
5. आचमनीयम्
त्रिपुरान्तक दीनार्तिनाश श्रीकण्ठशाश्वत।
गृहाणाचमनीयं च पवित्रोदककल्पितम्॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
अर्थ: "हे त्रिपुरान्तक! इस पवित्र आचमन-जल को ग्रहण करें।" (जल अर्पित करें)।
6. स्नानम् (पंचामृत स्नान हेतु गोदुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा के विशिष्ट मंत्रों का प्रयोग करें) (पहले शुद्ध जल, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से शिवलिंग को स्नान कराएं)।
7. वस्त्रम् (संबंधित वैदिक मंत्र का उच्चारण करें) (मौली धागे को वस्त्र के रूप में अर्पित करें)।
8. गन्धः
श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्‌।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्‌॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः गन्धं समर्पयामि।
अर्थ: "हे देव! यह दिव्य, सुगन्धित चन्दन का लेप स्वीकार करें।" (शिवलिंग पर चन्दन या विभूति का त्रिपुंड लगाएं)।
9. अक्षताः
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ शुभ्रा धूताश्च निर्मलाः।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
अर्थ: "हे परमेश्वर! मेरे द्वारा भक्तिपूर्वक अर्पित इन निर्मल अक्षतों (बिना टूटे चावल) को स्वीकार करें।" (अक्षत चढ़ाएं)।
10. पुष्पाणि
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो।
मयाऽऽनीतानि पुष्पाणि गृहाण परमेश्वर॥
अर्थ: "हे प्रभु! मेरे द्वारा लाये गए इन सुगन्धित पुष्पों को ग्रहण करें।" (सफ़ेद पुष्प और बिल्वपत्र अर्पित करें)।
11. बिल्वपत्रम्
बिल्वपत्रं सुवर्णेन त्रिशूलाकारमेव च।
मयाऽर्पितं महादेव! बिल्वपत्रं गृहाण मे॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः बिल्वपत्राणि समर्पयामि।
अर्थ: "हे महादेव! यह त्रिशूल के आकार का बिल्वपत्र मैं अर्पित करता हूँ, इसे ग्रहण करें।" (बिल्वपत्र चढ़ाएं)।
12. धूपम्
वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्‌॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः धूपं घ्रापयामि।
अर्थ: "वनस्पति रस से उत्पन्न यह उत्तम गंध (धूप) सभी देवों के लिए है, इसे स्वीकार करें।" (धूप दिखाएं)।
13. दीपः
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश! त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥
ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः दीपं दर्शयामि।
अर्थ: "हे देवेश! तीनों लोकों के अंधकार को हरने वाले! घी और बत्ती से युक्त, अग्नि से प्रज्वलित यह दीपक ग्रहण करें।" (घी का दीपक दिखाएं)।
14. नैवेद्यम् (संबंधित वैदिक मंत्र का उच्चारण करें) (फल, मिष्ठान्न, ऋतुफल आदि का भोग लगाएं)।
15. ताम्बूलम्
ॐ इमारुद्राय तव से कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहेमतीः...
(पूर्ण मंत्र)
ॐ शिवाय नमः तांबूलम् समर्पयामि ॥
(पान, सुपारी, इलायची, लौंग और दक्षिणा अर्पित करें)।
16. क्षमा-प्रार्थना
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्त्तिहीनं महेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु ते॥
अर्थ: "हे महेश्वर! मेरी पूजा मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन है। मैंने जो भी पूजा की है, आपकी कृपा से वह परिपूर्ण हो।"

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में आवाहन क्या होता है?

षोडशोपचार में आवाहनम् = देवता का प्रेमपूर्वक आवाहन कर उन्हें बुलाना — यह पूजा का प्रथम उपचार है।

पूजा विधि और अनुष्ठान

षोडशोपचार पूजन क्या होता है?

षोडशोपचार पूजन 16 उपचारों वाली पूजा विधि है जिसमें आसन, अर्घ्य, चंदन, पुष्प, दीप, नैवेद्य, स्तोत्र पाठ, आरती और समर्पण सहित सभी चरण शामिल हैं।

षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा क्या है?

षोडशोपचार पूजा = 16 उपचारों से की जाने वाली पूजा: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल और प्रदक्षिणा/नमस्कार।

षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में पाद्यम् क्या होता है?

षोडशोपचार में पाद्यम् = देवता के चरण धोने के लिए जल अर्पित करना।

षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में नैवेद्यम् क्या होता है?

षोडशोपचार में नैवेद्यम् = शुद्ध और सात्विक भोजन का भोग देवता को लगाना।

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