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वैष्णो देवी यात्रा 22 दिन बाद पुनः शुरू, भूस्खलन में 34 श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासन सतर्क
वैष्णोदेवी

वैष्णो देवी यात्रा 22 दिन बाद पुनः शुरू

📿 पौराणिक•3 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 19 सितंबर 2025
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26 अगस्त को हुए हादसे के बाद स्थगित यात्रा अब 17 सितंबर से शुरू होगी; श्राइन बोर्ड ने सुरक्षा इंतज़ाम पुख़्ता करने और हेलीकॉप्टर सेवाएँ बढ़ाने की घोषणा की।

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वैष्णो देवी यात्रा 22 दिन बाद पुनः शुरू होगी

वैष्णो देवी यात्रा 22 दिन बाद पुनः शुरू होगी, 34 श्रद्धालुओं की मौत वाले हादसे के बाद प्रशासन सतर्क

जम्मू एवं कश्मीर (रेसी जिला), 16 सितंबर 2025।

श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ यात्रा, जो लगभग तीन सप्ताह से रुकी हुई थी, अब 17 सितंबर (बुधवार) से फिर से शुरू होने जा रही है। यह निर्णय उस भीषण भूस्खलन के बाद लिया गया है, जिसने 26 अगस्त को कटरा–भवन मार्ग पर 34 श्रद्धालुओं की जान ले ली थी और सैकड़ों को प्रभावित किया था। अब, 22 दिनों के अंतराल के बाद, श्रद्धालुओं को एक बार फिर “जय माता दी” के जयकारों के साथ त्रिकुटा पर्वत की ओर बढ़ने की अनुमति मिलेगी—बशर्ते मौसम अनुकूल रहे।

हादसे के बाद बंद रही यात्रा

26 अगस्त की रात को मूसलधार बारिश और भूस्खलन ने यात्रा मार्ग को तहस-नहस कर दिया था। पहाड़ों से गिरे मलबे ने रास्तों को अवरुद्ध कर दिया और कई स्थानों पर सुरक्षा-दीवारें टूट गईं। यह दुर्घटना हाल के वर्षों की सबसे गंभीर त्रासदियों में से एक मानी जा रही है। उसी दिन यात्रा तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई थी।

पुनः आरंभ की घोषणा

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने शुक्रवार को आधिकारिक घोषणा की कि यात्रा 17 सितंबर से फिर शुरू होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति “weather permitting” यानी मौसम के अनुकूल होने पर ही लागू होगी। यदि अगले कुछ दिनों में लगातार बारिश या नए भूस्खलन की आशंका बनी रहती है, तो यात्रा पर पुनः रोक भी लगाई जा सकती है।

प्रशासनिक तैयारियाँ

यात्रा मार्ग पर भारी मशीनरी लगाकर मलबा हटाने का काम किया गया है। सुरक्षा एजेंसियाँ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से रास्तों की मजबूती की जाँच की है। बारिश घटने के साथ ही अस्थायी बैरिकेडिंग हटाई गई है और हेलीकॉप्टर सेवाओं को भी बढ़ाया गया है ताकि वृद्ध, बीमार और छोटे बच्चों वाले परिवारों को राहत दी जा सके। श्राइन बोर्ड ने भक्तों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम बुलेटिन देखकर ही बनाएं और केवल अधिकृत पोर्टल से ही टिकट या परमिट लें।

श्रद्धालुओं में राहत और उत्साह

यात्रा के फिर से शुरू होने की खबर से भक्तों में भारी उत्साह है। कई लोग कटरा और आसपास के क्षेत्रों में ही रुके हुए थे ताकि मार्ग खुलने के बाद तुरंत दर्शन कर सकें। सोशल मीडिया पर भी श्रद्धालुओं ने इसे “माता की कृपा” बताया। स्थानीय व्यापारी और होटल मालिकों के लिए भी यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। भूस्खलन और यात्रा स्थगन के कारण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा-मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “माता की कृपा से यात्रा पुनः शुरू हो रही है, सभी भक्त सुरक्षित रहें।”

📌 Fact Box – वैष्णो देवी यात्रा पुनः आरंभ

हादसा: 26 अगस्त 2025, भारी बारिश और भूस्खलन

मृतक: 34 श्रद्धालु (पुष्ट)

यात्रा स्थगन: 22 दिन (26 अगस्त – 16 सितंबर)

पुनः आरंभ: 17 सितंबर 2025, बुधवार (मौसम अनुकूल होने पर)

विशेष प्रबंध: मलबा हटाने का काम, बैरिकेडिंग, हेलीकॉप्टर सुविधा

अपील: यात्रा से पहले मौसम पूर्वानुमान देखें और केवल अधिकृत पोर्टल से ही पंजीकरण करें।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

ध्यान

ध्यान के दौरान कौन सा रंग पहनना चाहिए?

ध्यान हेतु वस्त्र: श्वेत — सात्विकता, शुद्धता (सर्वाधिक अनुशंसित)। पीत — वैष्णव परंपरा। भगवा — शैव/तांत्रिक परंपरा। काला — सामान्यतः वर्जित (तमोगुण)। सूती/ऊनी श्रेष्ठ। शुद्धता और भावना सर्वोपरि।

मंदिर

मंदिर में तिलक क्यों लगाया जाता है?

तिलक क्यों: स्कंद पुराण: तिलक बिना पूजा अफल। आगम शास्त्र: आज्ञाचक्र (भौहों के बीच) सक्रियण = देवता-ऊर्जा ग्रहण। परिचय: U आकार = वैष्णव, तीन रेखाएँ = शैव, लाल बिंदु = शाक्त। भस्म/चंदन = सुरक्षा-कवच। चंदन = शीतलता → एकाग्रता।

लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी नारायण की पूजा और केवल लक्ष्मी पूजा में क्या अंतर है?

लक्ष्मी-नारायण = स्थिर धन (विष्णु = लक्ष्मी स्थिर)। अकेली लक्ष्मी = चंचल (कुछ मान्यता)। दीपावली: लक्ष्मी-गणेश (प्रचलित) / लक्ष्मी-नारायण (वैष्णव)। विष्णु पूजा भी जरूर।

दस महाविद्या

कमला देवी की उपासना लक्ष्मी पूजा से कैसे भिन्न है?

कमला = दसवीं महाविद्या = 'तांत्रिक लक्ष्मी'। भिन्नता: लक्ष्मी = वैष्णव, विष्णु पत्नी, सात्विक। कमला = शाक्त/तांत्रिक, स्वतंत्र शक्ति, सिद्धि+मोक्ष। स्वरूप समान (कमल, गज)। लक्ष्मी = दीक्षा अनिवार्य नहीं। कमला = गुरु दीक्षा श्रेष्ठ। सामान्य: लक्ष्मी पूजा उत्तम।

पुराण परिचय

पुराण कितने हैं?

18 महापुराण हैं — वेदव्यास रचित। सबसे बड़ा स्कंद पुराण (81,100 श्लोक), सबसे प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत पुराण। तीन वर्ग: सात्विक (वैष्णव), राजसिक (ब्राह्म), तामसिक (शैव)। इनके अतिरिक्त 18 उपमहापुराण भी हैं।

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