विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में अश्वत्थामा के संदर्भ में आततायी शब्द आता है। श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जिसने रात में सोए हुए निरपराध बालकों की हत्या की है, वह आततायी है और दंड का अधिकारी है। कृष्ण यह भी बताते हैं कि धर्मज्ञ पुरुष असावधान, मतवाले, पागल, सोए हुए, बालक, स्त्री, विवेकहीन, शरणागत, रथहीन और भयभीत शत्रु को नहीं मारते। पाद टिप्पणी में आततायी के छह रूप बताए गए हैं: आग लगाने वाला, जहर देने वाला, बुरी नीयत से हथियार उठाने वाला, धन लूटने वाला, खेत छीनने वाला और स्त्री को छीनने वाला। अश्वत्थामा ने सोए हुए निरपराध बच्चों की हत्या की थी, इसलिए उसका कर्म आततायी और अधर्मपूर्ण माना गया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





