विस्तृत उत्तर
आत्मदेव को तुंगभद्रा नदी के तट पर बसे अनुपम नगर का ब्राह्मण बताया गया है। वह सभी वेदों का जानकार और श्रौत-स्मार्त कर्मों में निपुण था। पाठ में उसके तेज की तुलना दूसरे सूर्य से की गई है। वह धनी था, फिर भी भिक्षा से जीवन चलाता था। उसकी पत्नी धुंधुली कुलीन और सुंदर थी, पर स्वभाव से हठी, क्रूर, अधिक बोलने वाली, कृपण और झगड़ालू बताई गई है। आत्मदेव और धुंधुली के पास धन, भोग-सामग्री और सुंदर घर-द्वार थे, फिर भी उन्हें सुख नहीं था, क्योंकि उन्हें संतान नहीं थी। यही संतान-दुख आगे पूरी कथा का कारण बनता है।
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