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विस्तृत उत्तर
अघोर शिव ने ब्रह्मा को तब साक्षात् दर्शन दिया जब ब्रह्मा ध्यानपरायण होकर उनकी शरण में गये। ब्रह्मा ने ध्यानयुक्त मन से प्राणायाम किया, महेश्वर को हृदय में धारण किया, अघोररूप परमेश्वर की शरण ली और अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर उनका ध्यान करने लगे। इसके बाद घोर पराक्रम वाले अघोर महादेव ने उन ध्यानपरायण परमेष्ठी ब्रह्मा को साक्षात् दर्शन दिया।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 14, PDF पृष्ठ 67, श्लोक 7-8
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