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प्रकृति तत्त्व📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21-22, श्लोक 12-14⏱ 1 मिनट पठन

अजा प्रकृति क्या है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति है, जो बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है।

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विस्तृत उत्तर

अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति कही गई है। अव्यक्त से लेकर महत्तत्त्व और स्थूल पंचमहाभूत तक सम्पूर्ण जगत् उसके अधीन बताया गया है। वह रजोगुण, सत्त्वगुण और तमोगुण से युक्त होकर बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है। परमेश्वर से अधिष्ठित वही अजा अनन्त ब्रह्माण्डों की उत्पत्तिकर्त्री कही गई है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21-22, श्लोक 12-14
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

अजा प्रकृति क्या है को संदर्भ सहित समझें

अजा प्रकृति क्या है का सबसे सीधा सार यह है: अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति है, जो बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है।

प्रकृति तत्त्व जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21-22, श्लोक 12-14 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21-22, श्लोक 12-14 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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