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विस्तृत उत्तर
अकार, उकार और मकार प्रणवरूप रुद्र की स्तुति में आए तीन रूप हैं। विष्णु पहले अद्वितीय और नाशरहित प्रणवरूप रुद्र को नमस्कार करते हैं। फिर अकाररूप परमात्मा को नमस्कार करते हैं। उकाररूप आदिदेव विद्यादेह को भी प्रणाम करते हैं। तीसरे मकाररूप परमात्मा शिव को नमस्कार करते हैं। उसी क्रम में सूर्य, अग्नि और चन्द्र वर्ण वाले रुद्र तथा यजमानरूप महादेव को भी नमस्कार किया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 18, PDF पृष्ठ 83, श्लोक 1-2
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