विस्तृत उत्तर
आकाश संबंधी ऐश्वर्य को ऐन्द्र ऐश्वर्य भी कहा गया है। इसमें शरीर की छाया न होना, इन्द्रियों का प्रत्यक्ष दर्शन, आकाश में गमन, इन्द्रियों के अर्थ का ज्ञान, दूर से शब्द सुनने की क्षमता, सभी शब्दों के ज्ञान में पारंगत होना, तन्मात्राओं के स्वरूप का ज्ञान और सभी प्राणियों को साक्षात् देखने की सामर्थ्य शामिल है। पाठ में इन पाँच प्रकार के ऐश्वर्यों से युक्त साधक को कायव्यूहसामर्थ्यवान् कहा गया है।
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