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वैदिक संस्कार📜 गरुड़ पुराण, गृह्यसूत्र, कर्मकांड भास्कर, धर्मसिंधु3 मिनट पठन

अंत्येष्टि संस्कार कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

अंत्येष्टि = अंतिम यज्ञ (नरयाग)। विधि: शव स्नान → नया वस्त्र → तुलसी-गंगाजल → अर्थी → शवयात्रा → चिता स्थापन → छिद्र-घट परिक्रमा → मुखाग्नि → अस्थि संचय → गंगा विसर्जन → 10वीं शुद्धि → 13वीं श्राद्ध। पंचतत्वों में शरीर विलीन।

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विस्तृत उत्तर

अंत्येष्टि संस्कार षोडश संस्कारों में अंतिम संस्कार है। 'अन्त्य' = अंतिम, 'इष्टि' = यज्ञ — अर्थात अंतिम यज्ञ। इसे 'नरयाग' भी कहा जाता है।

मूल सिद्धांत

शरीर पंच तत्वों (क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर) से बना है। अंत्येष्टि में इन पंच तत्वों को पुनः प्रकृति में विलीन किया जाता है।

अंत्येष्टि की प्रमुख विधि

घर पर

  1. 1मृत्यु होने पर शव को भूमि पर लिटाएँ (दक्षिण दिशा में सिर)।
  2. 2शव को स्नान कराएँ — गंगाजल, पंचामृत से।
  3. 3नया शुभ्र वस्त्र पहनाएँ (नग्न शव का दाह निषिद्ध है)।
  4. 4माथे पर चन्दन तिलक, मुख में तुलसी पत्र और गंगाजल।
  5. 5शव को बांस की अर्थी (ठठरी) पर रखें।
  6. 6प्रथम पिण्डदान घर में ही दें।

शवयात्रा

  1. 1'राम नाम सत्य है' या 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण करते हुए श्मशान ले जाएँ।
  2. 2निकट सम्बन्धियों को कंधा देना चाहिए।
  3. 3मार्ग में शव को भूमि पर न रखें (विश्राम स्थल छोड़कर)।

श्मशान में

  1. 1चिता वेदी बनाएँ — पवित्र जल छिड़कें, गोबर से लीपें।
  2. 2शव को चिता पर उत्तर दिशा में सिर करके रखें।
  3. 3चार दिशाओं में चार बड़ी लकड़ियाँ (समिधा) स्थापित करें।
  4. 4दाह करने वाला व्यक्ति (ज्येष्ठ पुत्र या निकटतम) छेद वाले घड़े में जल लेकर चिता की तीन परिक्रमा करे।
  5. 5परिक्रमा के बाद घड़ा पीछे की ओर गिराकर फोड़ दें।
  6. 6मुखाग्नि दें — मुख की ओर से अग्नि प्रज्वलित करें।
  7. 7घी, कपूर आदि से अग्नि को प्रदीप्त करें।

दाह के बाद

  1. 1अस्थि संचय — तीसरे या चौथे दिन।
  2. 2अस्थि विसर्जन — गंगा या अन्य पवित्र नदी में।
  3. 310वें दिन शुद्धि कर्म, 13वें दिन मरणोत्तर संस्कार (तेरहवीं)।

विशेष: साधु-संतों और बच्चों (5 वर्ष से कम) को सामान्यतः दफनाया (भूमि-निक्षेप) या जल-प्रवाह किया जाता है, दाह नहीं। गरुड़ पुराण के अनुसार सही विधि से अंत्येष्टि करने से ही आत्मा को सद्गति मिलती है।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, गृह्यसूत्र, कर्मकांड भास्कर, धर्मसिंधु
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