विस्तृत उत्तर
अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए साधक को शुद्ध, शांत कमरे में आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, पाठ आरंभ करने से पूर्व संकल्प और न्यास के पश्चात् देवता के स्वरूप का ध्यान करना अनिवार्य है।
अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध, शांत कमरे में आसन पर बैठना चाहिए।
अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए साधक को शुद्ध, शांत कमरे में आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, पाठ आरंभ करने से पूर्व संकल्प और न्यास के पश्चात् देवता के स्वरूप का ध्यान करना अनिवार्य है।
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