विस्तृत उत्तर
असित कल्प उस कल्प को कहा गया है जो पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त हुआ। पाठ में कहा गया है कि पीतकल्प के बाद ब्रह्मा का दूसरा कल्प आरम्भ हुआ और उसका नाम असित कल्प था। इसी असित कल्प में एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त रहा। प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतित ब्रह्मा विचारमग्न हुए, पुत्रकामना से ध्यान करने लगे और उनका वर्ण काला हो गया। आगे इसी स्थिति में अघोर शिव का कृष्णवर्ण रूप प्रकट हुआ।
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