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विस्तृत उत्तर
आस्वाद सिद्धि दिव्य रसों के ज्ञान से जुड़ी है। पाठ में कहा गया है कि बिना किसी प्रयास के दिव्य रसों का सहज रूप से ठीक-ठीक ज्ञान होना आस्वाद सिद्धि है। यह छह सिद्धियों में पाँचवीं सिद्धि है। इसका विषय रस की सूक्ष्म अनुभूति है। फिर भी ये सिद्धियाँ योगमार्ग में आकर्षक उपसर्ग बन सकती हैं, इसलिए साधक को इनके प्रति सावधान रहना चाहिए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53, श्लोक 20
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