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विस्तृत उत्तर
अट्ठाईस करोड़ नरक पापी प्राणियों के कर्मफल-भोग के लिये बताए गए हैं। ऋषियों ने कहा कि अहंकार से लेकर मायापर्यन्त विभिन्न प्रकार के कुल अट्ठाईस करोड़ नरक हैं, जहाँ जाकर पापी प्राणी अपने कर्मों के फल भोगते हैं। ये वही प्राणी हैं जो शिव, रुद्र, शंकर, नीललोहित, जगत्पति, परमात्मा और महादेव का आश्रय ग्रहण नहीं करते।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 37, श्लोक 27-30
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