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विस्तृत उत्तर
12, 24 और 36 मात्रा वाले प्राणायाम मन्द, मध्यम और उत्तम कहलाते हैं। बारह लघु अक्षरों के उच्चारणकाल तक प्राणवायु को रोकना मन्द प्राणायाम है। उसके दुगुने, अर्थात् चौबीस मात्राओं तक रोकना मध्यम प्राणायाम है। तीन गुने, अर्थात् छत्तीस मात्राओं तक रोकना उत्तम प्राणायाम है। इनके शरीरगत लक्षण क्रमशः पसीना, कम्पन और उत्थान बताए गए हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 45-46, श्लोक 46-48
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