विस्तृत उत्तर
भगवान के चरणों की शरण इसलिए श्रेष्ठ बताई गई है कि परम ईश्वर और परम शांत मुनिजन उन्हीं चरणों की शरण में रहते हैं। पाठ कहता है कि भगवान के चरणों का स्पर्श मात्र संसार के जीवों को तुरंत पवित्र कर देता है। तुलना में गंगाजी के जल का बहुत दिनों तक सेवन किया जाए, तब कहीं पवित्रता प्राप्त होती है। यह तुलना भगवान के चरणाश्रय की तात्कालिक और उच्च पवित्रता को दिखाती है। चरणों की शरण केवल प्रतीक नहीं, बल्कि शांति, मुनियों के आश्रय और जीवों की शुद्धि का स्रोत है। इसलिए भगवान के चरणों का आश्रय गंगा-सेवन से भी शीघ्र पवित्रता देने वाला और सर्वोच्च शरण माना गया है।
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