विस्तृत उत्तर
भगवान के अकर्ता और फिर भी लीला से जगत-व्यवहार करने का रहस्य बताया गया है। वास्तव में भगवान के जन्म और कर्म प्राकृत नहीं हैं; तत्त्वज्ञानी उनके दिव्य जन्म और कर्म को वेदों का गोपनीय रहस्य मानकर वर्णन करते हैं। भगवान की लीला अमोघ है। वे लीला से संसार की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, लेकिन उसमें आसक्त नहीं होते। वे प्राणियों के अंतःकरण में छिपे रहकर ज्ञानेंद्रियों और मन के नियंता के रूप में विषयों को ग्रहण भी कराते हैं, फिर भी उनसे अलग रहते हैं। वे परम स्वतंत्र हैं और विषय उन्हें कभी लिप्त नहीं कर सकते। इसलिए भगवान जगत में कार्य करते हुए भी जगत से बंधते नहीं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





