विस्तृत उत्तर
भागवत कथा की तैयारी कई चरणों में बताई गई है। सबसे पहले ज्योतिषी से मुहूर्त पूछना और विवाह की तरह धन की व्यवस्था करना चाहिए। फिर सहायकों को साथ लेकर निमंत्रण, आगंतुकों के निवास और कथा स्थल की व्यवस्था करनी चाहिए। स्थान शुद्ध कर मंडप बनाने से पहले घर या स्थल को खाली और व्यवस्थित किया जाता है। बिछाने की वस्तुएँ पाँच दिन पहले से एकत्र करने का निर्देश है। मंडप सजाकर आसन तैयार किए जाते हैं। कथा आरंभ के एक दिन पहले वक्ता को क्षौर कराने की बात कही गई है। आरंभ के दिन अरुणोदय में शौच-स्नान, नित्यकर्म, गणेश पूजा, पितृ तर्पण और श्रीहरि स्थापना से विधि आगे बढ़ती है।
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