विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में सूतजी स्पष्ट कहते हैं कि मन की शुद्धि के लिये श्रीमद्भागवत से बढ़कर कोई साधन नहीं है। वे पहले इसे संसार-भय को नष्ट करने वाला सार बताते हैं। फिर कहते हैं कि यह भक्ति के प्रवाह को बढ़ाता है और भगवान श्रीकृष्ण की प्रसन्नता का कारण है। कलियुग के जीवों को कालरूपी सर्प के मुख में पड़े हुए की तरह भयग्रस्त बताया गया है, और श्रीमद्भागवत को उस भय के नाश के लिये कहा गया शास्त्र माना गया है। इसी कारण भागवत कथा मन को केवल जानकारी देकर नहीं, बल्कि भक्ति को जगाकर और भगवान की कथा में चित्त लगाकर शुद्ध करती है। स्रोत के अनुसार भागवत का श्रवण जन्म-जन्मांतर के पुण्य से मिलता है और वह मनुष्य को कलियुग के मोह, भय और अशांति से हटाकर भगवान की ओर लगाता है।
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