विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण सुनने की इच्छा का फल बहुत ऊँचा बताया गया है। पाठ कहता है कि महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित इस श्रीमद्भागवत में परम धर्म और परमात्मा का निरूपण है। यह परमात्मा तीन तापों का मूल से नाश करने वाला और परम कल्याण देने वाला है। आगे कहा गया है कि जिस समय भी सुकृती पुरुष इसके श्रवण की इच्छा करते हैं, उसी समय ईश्वर अविलंब उनके हृदय में आकर बंध जाता है। यहाँ श्रवण की इच्छा केवल जिज्ञासा नहीं है, बल्कि शुद्ध अंतःकरण, श्रद्धा और भगवत संबंध का द्वार है। इसलिए भागवत सुनने की इच्छा को ईश्वर के हृदय में विराजमान होने से जोड़ा गया है।
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