विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भागवत सप्ताह को मुक्ति से जोड़ा गया है। सूतजी बताते हैं कि कलियुग में भगवत्स्वरूप श्रीमद्भागवत का पढ़ना और सुनना वैकुंठफल देने वाला है। इसके बाद वे कहते हैं कि सप्ताह-विधि से सुना गया यही भागवत सर्वथा मुक्ति देने वाला है। इसी प्रसंग में यह भी बताया गया है कि दयालु सनकादि ऋषियों ने पूर्वकाल में नारदजी को भागवत का यह माहात्म्य सुनाया था और सप्ताह-श्रवण की विधि भी उन्हीं ने बताई थी। सप्ताह की पूरी विधि विस्तार से नहीं दी गई, पर उसका फल स्पष्ट बताया गया है। इसलिए स्रोत के अनुसार भागवत सप्ताह श्रद्धा से किया गया भागवत-श्रवण है, जिसका उद्देश्य भक्ति को बढ़ाना, मन को शुद्ध करना और जीव को वैकुंठफल अथवा मुक्ति की दिशा में ले जाना है।
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