विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह के लिये मुहूर्त देखने की विधि में सबसे पहले ज्योतिषी को प्रयत्नपूर्वक बुलाने का निर्देश है। उससे मुहूर्त पूछकर कथा की तिथि निश्चित करनी चाहिए। पाठ में कथा आरंभ के लिये भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण को शुभ माना गया है, पर इन महीनों में भी भद्रा और व्यतीपात जैसे कुयोगों को त्यागने को कहा गया है। इसलिए मुहूर्त चुनते समय तीन बातें साथ रखी जाती हैं: योग्य ज्योतिषी की सलाह, शुभ महीना और दोषरहित समय। इसी के बाद विवाह जैसी धन-व्यवस्था और सहायकों की नियुक्ति कर कथा की तैयारी आरंभ की जाती है।
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