विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह के बाद बारह ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान व्रत की पूर्ति से जुड़ा है। विष्णुसहस्रनाम और दोष-शांति के बाद कहा गया है कि बारह ब्राह्मणों को खीर, मधु आदि उत्तम पदार्थ खिलाए जाएँ। फिर व्रतपूर्ति के लिये गौ और सुवर्ण का दान किया जाए। यह समापन में सत्कार, दान और पुण्य की पूर्णता का भाग है। सप्ताह में पहले भी पाँच ब्राह्मणों को जप के लिये वरण करने का निर्देश है, और अंत में बारह ब्राह्मणों को भोजन कराने का। इससे ब्राह्मण-सत्कार, अन्नदान और व्रत की पूर्णता एक साथ जुड़ते हैं। भोजन की सामग्री भी मधुर और उत्तम बताई गई है।
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