विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में मन को शुद्ध और कथा में स्थिर रखने का निर्देश है। जो श्रोता लोक, संपत्ति, धन, घर और पुत्र की चिंता छोड़कर केवल कथा में ध्यान रखता है, वह श्रवण का उत्तम फल पाता है। मन में काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को आने नहीं देना चाहिए। निंदा से बचना चाहिए और अनुचित संग से दूर रहना चाहिए। इसके स्थान पर सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदारता का व्यवहार रखना चाहिए। इससे पता चलता है कि सप्ताह केवल कान से सुनना नहीं, बल्कि मन का शोधन है। मन चिंता, द्वेष और अहंकार से हटकर भागवत कथा, भक्ति और विनय में टिकना चाहिए।
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