विस्तृत उत्तर
भागवत श्रवण से गोलोक मिलने का वर्णन गोकर्ण की दूसरी सप्ताह कथा में आता है। श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर उसी विधि से सप्ताह कथा कही और श्रोताओं ने पुनः श्रवण किया। कथा समाप्त होने पर भगवान भक्तों से भरे विमानों के साथ प्रकट हुए। चारों ओर जय-जयकार और नमस्कार की ध्वनि हुई। भगवान ने स्वयं पांचजन्य शंख बजाया, गोकर्ण को हृदय से लगाया और अपने समान बना लिया। अन्य श्रोताओं को भी मेघ के समान श्यामवर्ण, पीतांबरधारी, मुकुट और कुण्डलों से युक्त दिव्य रूप दिया गया। गाँव के जीवों तक को विमानों में बैठाया गया और हरिलोक भेजा गया। श्रीकृष्ण कथा-श्रवण से प्रसन्न होकर गोकर्ण को साथ लेकर गोलोक गए।
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