विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत का लाभ सीधे भक्ति से जोड़ा गया है। वेदव्यासजी ने देखा कि जीव माया से मोहित होकर अपने को गुणमय मानता है और उसी भ्रम से अनेक अनर्थ भोगता है। इन अनर्थों की शांति का प्रत्यक्ष साधन भगवान का भक्ति-योग है, लेकिन संसार के लोग इस बात को नहीं जानते। इसलिए वेदव्यासजी ने श्रीमद्भागवत की रचना की। पाठ कहता है कि श्रीमद्भागवत के श्रवण मात्र से पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण में परम प्रेममयी भक्ति उत्पन्न होती है। वही भक्ति जीव के शोक, मोह और भय को दूर करती है। इसलिए भागवत सुनना केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि जीव को माया-जनित भ्रम से हटाकर कृष्ण-भक्ति में लगाने वाला साधन बताया गया है।
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