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विस्तृत उत्तर
भगवान शिव 'महाकाल' हैं — अर्थात वे 'काल' (समय एवं मृत्यु) के स्वामी हैं।
उज्जैन 'महाकाल' की नगरी है, जो स्वयं 'काल' के अधिपति हैं। यहाँ कालसर्प की पूजा सीधे 'काल' के स्वामी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है।
कालसर्प दोष, वस्तुतः, 'काल' (शिव) द्वारा 'सर्प' (नाग) के माध्यम से दिया गया एक कार्मिक दण्ड या संतुलन-चक्र है, इसीलिए शिव को महाकाल कहा जाता है।
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