विस्तृत उत्तर
उन्हें 'भैरव' कहा गया क्योंकि वे भयानक स्वरूप वाले होते हुए भी संपूर्ण ब्रह्मांड का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं (भरण-पोषण से भैरव)।
'भैरव' नाम का क्या अर्थ है को संदर्भ सहित समझें
'भैरव' नाम का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: 'भैरव' नाम का अर्थ: भयानक स्वरूप वाले होते हुए भी संपूर्ण ब्रह्मांड का भरण-पोषण करने में सक्षम — 'भरण-पोषण' से 'भैरव' नाम बना।
भैरव परिचय जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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अष्ट भैरव कौन हैं?
अष्ट भैरव आठ दिशाओं के संरक्षक हैं: असितांग भैरव, रुरु भैरव, चंड भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाल भैरव, भीषण भैरव और संहार भैरव — ये सभी भैरव की बहुआयामी शक्ति के प्रतीक हैं।
भैरव काशी के कोतवाल क्यों कहलाते हैं?
ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति काशी में मिली — तभी से भैरव काशी के कोतवाल और 'दंडपाणि' (हाथ में दंड धारण करने वाले) हुए जो काशी में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।
भैरव को 'पाप-भक्षक' क्यों कहते हैं?
शिव ने भैरव को वरदान दिया कि वे अपने भक्तों के पापों का क्षण भर में भक्षण कर लेंगे — इसीलिए वे 'पाप-भक्षक' कहलाते हैं।
भैरव को 'कालभैरव' क्यों कहते हैं?
शिव ने कहा: 'तुम काल के भी काल की तरह चमकते हो — इसलिए कालराज और चूँकि काल भी तुमसे भयभीत होगा इसलिए कालभैरव।' यह नाम समय और मृत्यु पर उनके पूर्ण अधिकार को दर्शाता है।
भैरव की उत्पत्ति कैसे हुई?
शिव पुराण: ब्रह्मा-विष्णु विवाद में ब्रह्मा ने मिथ्या दावा किया — शिव के क्रोध से उनकी भृकुटियों के मध्य से कालभैरव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा के अहंकार-युक्त पांचवें सिर का छेदन किया। भैरव का जन्म अहंकार-विनाश के लिए हुआ।
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