विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह भरतवंशियों के गौरव और पांडवों के पितामह थे। महाभारत युद्ध के बाद वे कुरुक्षेत्र में बाणों की शय्या पर पड़े थे। पांडवों ने श्रीकृष्ण के साथ उन्हें स्वर्ग से गिरे हुए देवता के समान पृथ्वी पर पड़ा देखा और प्रणाम किया। अनेक ऋषि, देवर्षि और राजर्षि भी उन्हें देखने आए। भीष्म धर्म और देश-काल का ज्ञान रखते थे, इसलिए उन्होंने आए हुए महर्षियों का यथायोग्य सम्मान किया। वे कृष्ण का वास्तविक भाव भी जानते थे और उन्हें बाहर तथा भीतर दोनों रूपों में पूजते थे। युधिष्ठिर ने उनसे धर्म के रहस्य पूछे। भीष्म ने मृत्यु से पहले धर्म का उपदेश दिया, कृष्ण की स्तुति की और मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।
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