विस्तृत उत्तर
भोजपत्र पर निर्मित यंत्र 6 वर्षों तक फलदायी होता है।
भोजपत्र पर बने श्रीयंत्र का क्या फल है को संदर्भ सहित समझें
भोजपत्र पर बने श्रीयंत्र का क्या फल है का सबसे सीधा सार यह है: भोजपत्र पर निर्मित श्रीयंत्र 6 वर्षों तक फलदायी होता है।
श्रीयंत्र और धातु जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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श्रीयंत्र और धातु श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
विषय की गहराई समझने के लिए इन संबंधित प्रश्नों को भी पढ़ें
ताम्र निर्मित श्रीयंत्र का क्या फल है?
ताम्र निर्मित श्रीयंत्र 'अधम' श्रेणी का है — इसका फल 'सौ गुणा' होता है और यह 12 वर्षों तक प्रभावी रहता है।
रजत निर्मित श्रीयंत्र का क्या फल है?
रजत निर्मित श्रीयंत्र 'मध्यम' है — इसका फल 'कोटिगुणा' (करोड़ गुना) होता है और यह 22 वर्षों तक पूर्ण प्रभाव से फल देता है।
स्वर्ण निर्मित श्रीयंत्र का क्या फल है?
स्वर्ण निर्मित श्रीयंत्र 'उत्तम' है — इसका फल 'अनंतगुणा' होता है और यह आजीवन फलदायी रहता है। यह एक दिव्य बैटरी जैसा है जो कभी क्षीण नहीं होती।
श्रीयंत्र की पूजा से क्या लाभ होता है?
श्रीयंत्र की नित्य पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है — इसकी कृपा से धन, समृद्धि, यश, कीर्ति, अष्टसिद्धि और नवनिधि मिलती है।
श्रीयंत्र को 'यंत्रराज' क्यों कहते हैं?
श्रीयंत्र समस्त यंत्रों में सर्वश्रेष्ठ 'यंत्रराज' है — यह आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप है और इसके दर्शन मात्र से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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