विस्तृत उत्तर
भृगु पत्नी वध की कथा मुख्य रूप से पुराण-साहित्य में मिलती है। मत्स्य पुराण और पद्म पुराण में काव्या माता के वध तथा भृगु ऋषि के श्राप का स्पष्ट वर्णन मिलता है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण में इस कथा की पृष्ठभूमि, अर्थात शुक्राचार्य की तपस्या और देवताओं द्वारा असुरों पर आक्रमण का विस्तार मिलता है। वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में विश्वामित्र ताड़का वध के प्रसंग में भृगु-पत्नी वध को उदाहरण रूप में रखते हैं। उत्तर कांड की परंपरा में भृगु श्राप का संबंध राम के सीता-वियोग से भी जोड़ा गया है।
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