विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा ने अविद्या सृष्टि के संचालन के लिए बनाई। जीव मूल रूप से चेतन और आनंदस्वरूप हैं। यदि उन्हें अपना शुद्ध आत्मस्वरूप स्मरण रहे, तो वे भौतिक शरीर और संसार के बंधन को स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए कर्मफल भोगने और सृष्टि-लीला चलाने के लिए जीवों पर अज्ञान का आवरण आवश्यक हुआ। श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपनी छाया से पंचपर्वा अविद्या की रचना की। इससे जीव शरीर को अपना मानने लगा, परिवार और भोगों में आसक्त हुआ और जन्म-मरण के चक्र में बंध गया। हंस अवतार इसी अज्ञान को काटने वाला ज्ञान देता है।
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