विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा का कमल से जन्म विष्णु की नाभि से निकले कमल से जुड़ा बताया गया है। प्रलय-सागर में शेषशय्या पर स्थित विष्णु ने अपनी क्रीड़ा के लिए नाभि से एक विशाल, शत योजन विस्तीर्ण और सूर्य के समान तेजस्वी कमल उत्पन्न किया। ब्रह्मा उस कमल और विष्णु को देखकर विस्मित हुए। आगे जब ब्रह्मा विष्णु के उदर में प्रवेश करके लौटना चाहते हैं, तो वे अत्यन्त सूक्ष्म रूप धारण कर नाभि में मार्ग पाते हैं और कमलनाल के सहारे बाहर निकलते हैं। तब पद्मगर्भ के समान कान्तिवाले स्वयम्भू ब्रह्मा कमल पर शोभित होते हैं।
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