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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा ने सद्योजात शिव को परमेश्वर ध्यानयोग से जाना। सद्योजात कुमार को देखकर सर्वतोमुख ब्रह्मा ने ब्रह्मरूपी महात्मा परमेश्वर को हृदय में धारण किया और ध्यानयोग में तत्पर हुए। फिर ध्यानयोग से उन्हें साक्षात् परमेश्वर जानकर प्रणाम किया। ब्रह्मा ने उस सद्योजात कुमार को परात्पर ब्रह्म के रूप में कल्पित और स्वीकार किया।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 11, PDF पृष्ठ 63, श्लोक 4-5
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