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विस्तृत उत्तर
बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाओं की संज्ञा बताई गई है। वर्णन इन अवस्थाओं को विस्तार से अलग-अलग नहीं समझाता, पर इतना स्पष्ट करता है कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूपों को जगत् में अपनी-अपनी विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाओं से जोड़ा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21, श्लोक 9
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