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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और यति अपने-अपने आश्रम धर्म का पालन करने से साधु होते हैं। ब्रह्मचारी विद्या की साधना करके गुरु का हित करता है। गृहस्थ विहित कर्मों की साधना करता है। वानप्रस्थ या वैखानस वन में तपस्या की साधना करता है। यति योग की साधना और यतिधर्म में परायण होता है। इस प्रकार साधुता आश्रम के अनुसार धर्म-साधन से जुड़ी है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 57-58, श्लोक 8-10
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