विस्तृत उत्तर
चन्द्रशेखराष्टकम् की फलश्रुति (श्लोक 10) इस प्रकार है:
मृत्युभीतमृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौ। यत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत्।
सरल अर्थ: मृत्यु के भय से भयभीत मार्कण्डेय ऋषि द्वारा रचित इस स्तुति को जो कोई भी, शिव के पास या कहीं भी पढ़ता है, उसे मृत्यु का भय नहीं होता। चन्द्रशेखर स्वयं उसे पूर्ण आयु, निरोगी जीवन (आरोगिताम्), सम्पूर्ण धन-संपदा (अखिलार्थसम्पदम्) देते हैं और बिना किसी विशेष प्रयास के (अयत्नतः) अंत में मुक्ति प्रदान करते हैं।





