विस्तृत उत्तर
दशरथ ने दूतों से समाचार सुनकर अपार हर्ष अनुभव किया। गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा से बारात की तैयारी शुरू करवाई।
चौपाई — 'राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाँचि सुनाई। सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं॥'
अर्थ — राजाने सारे रनिवासको बुलाकर जनकजीकी पत्रिका बाँचकर सुनायी। समाचार सुनकर सब रानियाँ हर्षसे भर गयीं। राजाने फिर दूसरी सब बातोंका वर्णन किया।
रानियाँ प्रेम से प्रफुल्लित हुईं — 'प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखनि सुनि बारिद बानी' — जैसे मोरनी बादलोंकी गर्ज सुनकर प्रफुल्लित होती हैं। बड़ी-बूढ़ी स्त्रियाँ आशीर्वाद दे रहीं, माताएँ आनन्द में मग्न।





