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दत्तात्रेय मंत्र का जप गुरु कृपा के लिए कैसे करें?

दत्तात्रेय = त्रिमूर्ति अवतार, आदि गुरु। 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' 108। गुरुवार, दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)। रुद्राक्ष, औदुंबर (गूलर) वृक्ष नीचे। 24 गुरु (प्रकृति)। गुरु कृपा/ज्ञान/मार्गदर्शन।

संक्षिप्त उत्तर

दत्तात्रेय = त्रिमूर्ति अवतार, आदि गुरु। 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' 108। गुरुवार, दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)। रुद्राक्ष, औदुंबर (गूलर) वृक्ष नीचे। 24 गुरु (प्रकृति)। गुरु कृपा/ज्ञान/मार्गदर्शन। महाराष्ट्र/कर्नाटक प्रचलित।

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विस्तृत उत्तर

भगवान दत्तात्रेय = ब्रह्मा-विष्णु-महेश (त्रिमूर्ति) का एकीकृत अवतार। अत्रि ऋषि और अनसूया के पुत्र। आदि गुरु — गुरु तत्व के प्रतीक।

दत्तात्रेय मंत्र

  1. 1मूल: 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः'
  2. 2सरल: 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' (108 बार)
  3. 3दत्त गायत्री: 'ॐ दिगंबराय विद्महे अवधूताय धीमहि तन्नो दत्तः प्रचोदयात्'
  4. 4षोडशाक्षर: 'ॐ ऐं क्रों क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं सौः दत्तात्रेयाय स्वाहा'

जप विधि

  • ▸गुरुवार विशेष (गुरु दिवस)।
  • ▸दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) सर्वोत्तम।
  • ▸रुद्राक्ष माला, प्रातःकाल, पूर्व/उत्तर दिशा।
  • ▸चंदन, फल, दूध भोग।
  • ▸औदुंबर (गूलर) वृक्ष के नीचे जप विशेष फलदायी — दत्त = औदुंबर वासी।

गुरु कृपा हेतु

  • ▸दत्तात्रेय = 'आदि गुरु' — गुरु तत्व के अधिष्ठाता।
  • ▸गुरु कृपा, सच्चे गुरु प्राप्ति, ज्ञान, मार्गदर्शन हेतु।
  • ▸दत्त ने 24 गुरु बनाए (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि आदि) — प्रकृति से सीखा।

प्रचलित क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात में दत्त संप्रदाय अत्यंत प्रचलित। गुरु चरित्र = दत्त भक्तों का प्रमुख ग्रंथ।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

दत्तात्रेय मंत्र का जप गुरु कृपा के लिए कैसे करें को संदर्भ सहित समझें

दत्तात्रेय मंत्र का जप गुरु कृपा के लिए कैसे करें का सबसे सीधा सार यह है: दत्तात्रेय = त्रिमूर्ति अवतार, आदि गुरु। 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' 108। गुरुवार, दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)। रुद्राक्ष, औदुंबर (गूलर) वृक्ष नीचे। 24 गुरु (प्रकृति)। गुरु कृपा/ज्ञान/मार्गदर्शन। महाराष्ट्र/कर्नाटक प्रचलित।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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