विस्तृत उत्तर
भगवान दत्तात्रेय = ब्रह्मा-विष्णु-महेश (त्रिमूर्ति) का एकीकृत अवतार। अत्रि ऋषि और अनसूया के पुत्र। आदि गुरु — गुरु तत्व के प्रतीक।
दत्तात्रेय मंत्र
- 1मूल: 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः'
- 2सरल: 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' (108 बार)
- 3दत्त गायत्री: 'ॐ दिगंबराय विद्महे अवधूताय धीमहि तन्नो दत्तः प्रचोदयात्'
- 4षोडशाक्षर: 'ॐ ऐं क्रों क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं सौः दत्तात्रेयाय स्वाहा'
जप विधि
- ▸गुरुवार विशेष (गुरु दिवस)।
- ▸दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) सर्वोत्तम।
- ▸रुद्राक्ष माला, प्रातःकाल, पूर्व/उत्तर दिशा।
- ▸चंदन, फल, दूध भोग।
- ▸औदुंबर (गूलर) वृक्ष के नीचे जप विशेष फलदायी — दत्त = औदुंबर वासी।
गुरु कृपा हेतु
- ▸दत्तात्रेय = 'आदि गुरु' — गुरु तत्व के अधिष्ठाता।
- ▸गुरु कृपा, सच्चे गुरु प्राप्ति, ज्ञान, मार्गदर्शन हेतु।
- ▸दत्त ने 24 गुरु बनाए (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि आदि) — प्रकृति से सीखा।
प्रचलित क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात में दत्त संप्रदाय अत्यंत प्रचलित। गुरु चरित्र = दत्त भक्तों का प्रमुख ग्रंथ।





